Prostate Health Tips - प्रोस्टेट बढ़ना (Prostate Enlargement) कारण, लक्षण और आयुर्वेदिक उपाय - इस पोस्ट में हम एक ऐसी समस्या के बारे में बात करेंगे जो पहले आमतौर पर 00 साल की उम्र के बाद देखने को मिलती थी, लेकिन आजकल यह परेशानी 00 साल की उम्र के बाद भी तेजी से सामने आने लगी है।
इस बीमारी को प्रोस्टेट एनलार्जमेंट कहा जाता है, जिसे आम भाषा में गदूद का बढ़ना भी कहा जाता है।
प्रोस्टेट एक छोटी सी ग्रंथि होती है जो पेशाब की थैली के ठीक नीचे और उसके चारों ओर स्थित रहती है। इसका आकार सामान्य रूप से अखरोट के बराबर होता है। यह ग्रंथि पुरुषों के प्रजनन तंत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा है क्योंकि इसमें वह द्रव बनता है जो वीर्य का हिस्सा होता है।
जब यह ग्रंथि धीरे-धीरे आकार में बढ़ने लगती है, तब शुरुआत में ज्यादा परेशानी महसूस नहीं होती। लेकिन समय के साथ यह समस्या बढ़ती जाती है और कई तरह की दिक्कतें पैदा करने लगती है।
प्रोस्टेट बढ़ने के मुख्य लक्षण
जब प्रोस्टेट का आकार बढ़ने लगता है तो सबसे पहले असर पेशाब की प्रक्रिया पर पड़ता है।
सबसे सामान्य लक्षण यह होता है कि व्यक्ति को बार-बार पेशाब जाने की इच्छा होने लगती है। खासकर रात के समय एक बार, दो बार या कई बार उठकर पेशाब जाना पड़ता है। इसके अलावा पेशाब की धार पहले की तुलना में कमजोर हो जाती है।
कई बार ऐसा होता है कि पेशाब करने के बाद भी पेशाब की थैली पूरी तरह खाली नहीं होती। उसमें थोड़ा पेशाब रह जाता है और कुछ ही समय बाद फिर से पेशाब की इच्छा होने लगती है। इसी बचे हुए पेशाब में कई बार संक्रमण भी हो जाता है जिससे पेशाब में जलन महसूस होने लगती है।
इसके साथ-साथ पेट के निचले हिस्से में भारीपन रहने लगता है। क्योंकि प्रोस्टेट ग्रंथि वीर्य द्रव के निर्माण से जुड़ी होती है, इसलिए इसके बढ़ने से शरीर में कमजोरी महसूस होने लगती है। कई लोगों में यौन इच्छा कम होने लगती है और कभी-कभी डिस्चार्ज भी ठीक से नहीं हो पाता, जिससे मानसिक और शारीरिक दोनों तरह की परेशानी बढ़ जाती है।
प्रोस्टेट बढ़ने के प्रमुख कारण
आज की जीवनशैली में कुछ आदतें ऐसी हैं जो इस समस्या को तेजी से बढ़ा रही हैं।
सबसे बड़ा कारण है लैपटॉप को गोद में रखकर लंबे समय तक इस्तेमाल करना। लैपटॉप से निकलने वाली गर्मी सीधे उस क्षेत्र पर असर डालती है और इससे प्रोस्टेट की समस्या बढ़ सकती है।
दूसरा कारण है टेस्टोस्टेरोन बढ़ाने वाली दवाओं या इंजेक्शन का उपयोग। बहुत से लोग मांसपेशियां बढ़ाने या ताकत बढ़ाने के लिए ऐसी दवाएं लेते हैं, जिनका साइड इफेक्ट प्रोस्टेट पर पड़ सकता है।
तीसरा कारण है भोजन की गलत आदतें। जो लोग बहुत अधिक खट्टा, तला-भुना, मिर्च-मसालेदार भोजन खाते हैं उनमें यह समस्या जल्दी देखने को मिलती है।
इसके अलावा पेशाब को बार-बार रोकने की आदत भी इस बीमारी को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
आयुर्वेद के अनुसार जब शरीर में वात दोष बढ़ जाता है और कफ दोष प्रोस्टेट क्षेत्र में जमा होने लगता है, तब धीरे-धीरे यह ग्रंथि बढ़ने लगती है।
प्रोस्टेट के लिए उपयोगी प्राकृतिक उपाय
यदि समय रहते कुछ सही उपाय अपनाए जाएं तो इस समस्या को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।
कद्दू के बीज
कद्दू के बीज प्रोस्टेट स्वास्थ्य के लिए बहुत लाभकारी माने जाते हैं। इनमें जिंक की मात्रा काफी अधिक होती है। यदि रोजाना लगभग एक चम्मच कद्दू के बीज खाए जाएं तो प्रोस्टेट से जुड़ी समस्याओं की संभावना काफी कम हो जाती है।
गोखरू का चूर्ण
यदि पेशाब से जुड़ी समस्या हो रही हो तो गोखरू का चूर्ण बहुत उपयोगी माना जाता है। एक चम्मच गोखरू चूर्ण दिन में दो बार पानी के साथ लेने से मूत्र तंत्र को मजबूती मिलती है और पेशाब संबंधी परेशानियों में राहत मिलती है।
शिलाजीत
कई लोग टेस्टोस्टेरोन बढ़ाने के लिए दवाएं लेते हैं जिससे प्रोस्टेट की समस्या बढ़ सकती है। इसके बजाय प्राकृतिक रूप से शिलाजीत का सेवन करना अधिक सुरक्षित माना जाता है।
शिलाजीत मूत्र तंत्र को मजबूत बनाता है और प्रोस्टेट के बढ़ने की गति को धीमा करने में मदद करता है।
कांचनार गुग्गुल
आयुर्वेद में एक प्रसिद्ध औषधि है कांचनार गुग्गुल। यह शरीर की विभिन्न ग्रंथियों के असामान्य बढ़ने को नियंत्रित करने में सहायक मानी जाती है।
यदि गोखरू घन, शिलाजीत वटी और कांचनार गुग्गुल की दो-दो गोलियां दिन में दो बार ली जाएं, तो इससे पेशाब की समस्या और प्रोस्टेट से जुड़ी परेशानियों में राहत मिल सकती है।
केले के छिलके की राख
एक पारंपरिक उपाय यह भी है कि केले के छिलकों को छाया में सुखाकर उनकी राख बनाई जाए। इस राख को 0 से 0 ग्राम मात्रा में दिन में दो बार शहद या पानी के साथ लेने से प्रोस्टेट के बढ़ने की गति कम करने में मदद मिल सकती है।
अश्वगंधा और शतावरी
अश्वगंधा और शतावरी दोनों ही आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियां शरीर को ताकत देने और प्रजनन तंत्र को संतुलित रखने में सहायक मानी जाती हैं।
यदि दोनों को मिलाकर एक चम्मच मात्रा में दूध या पानी के साथ लिया जाए तो प्रोस्टेट ग्रंथि से जुड़ी समस्याओं में लाभ मिल सकता है।
सहजन की फली (मोरिंगा)
सांभर में जो लंबी फली होती है, जिसे अक्सर लोग अलग कर देते हैं, वही सहजन की फली होती है। यह शरीर के लिए बहुत पोषक मानी जाती है और इसमें कई आवश्यक पोषक तत्व होते हैं। इसके नियमित सेवन से भी प्रोस्टेट स्वास्थ्य में लाभ मिल सकता है।
त्रिफला चूर्ण
जिन लोगों को प्रोस्टेट के साथ-साथ कब्ज और गैस की समस्या भी रहती है, उनके लिए त्रिफला चूर्ण बहुत लाभकारी है। रात को एक चम्मच त्रिफला चूर्ण दूध या पानी के साथ लेने से पाचन
Çeviri yapılırken hata oluştu. Tekrar hemen çevir butonuna tıklayınız.